Indira Gandhi Biography Hindi | इंदिरा गाँधी का जीवन परिचय

जब भी संसार की सबसे सशक्त महिलाओं को याद किया जाता है तो इंदिरा गाँधी जी को जरूर याद किया जाता है. Indira Gandhi Biography In Hindi में आप जानेंगे इंदिरा गाँधी की जीवनी यानी जीवन परिचय. जिसमें उनके बारे में आपको बहुत कुछ पता चलेगा. कुछ बातें तो ऐसी भी होंगी जो पहले कभी किसी ने नहीं सुनी.

इंदिरा गाँधी का जीवन परिचय बहुत ही प्रेरणादायक है. प्यार से जिन्हें उनके घर वाले इंदु नाम से पुकारते थे, वो कैसे परिस्थितियों का मुकाबला करते हुए भारत देश की प्रधानमंत्री बन गयी ये सब आप आज जानेंगे. भारत देश में इंदिरा गाँधी जी को सर्वोच्च सम्मान हासिल है. हर इंसान उनकी इज्ज़त करता है.

भारत देश के आज़ाद होने के बाद हमारी तीसरी प्रधानमंत्री Indira Gandhi जी ही थी. वो लगभग 15 साल तक देश की प्रधानमंत्री रहीं और देश के लिए कई अहम् फैसले लिए.

ऐसा नहीं है की उनके साथ कोई विवाद नहीं हुआ, बहुत सी बातें हुयी जिन्होंने इंदिरा गाँधी जी को भी दुखी कर दिया था. जैसे आपको याद होगा आपातकाल का वो दौर जो 1975 से 1977 के बीच रहा था. उस समय वो काफी विवादों में रहीं. लेकिन उसके बाद से ही उन्हें महिला सशक्तिकरण के दौर के लिए भी याद किया जाता है.

इंदिरा गाँधी की जीवनी

Indira Gandhi जी की History वाकई काफी लोगों को Motivate करने वाली हो सकती है. कई विदेशी नेताओं ने भी उस वक़्त कहा था की हमें आज तक उसके जितनी शक्तिशाली महिला नहीं देखी. शक्तिशाली होने का मतलब ये नहीं की वो बलवान थी, बल्कि उनके फैसलों और कार्यों के कारण उनकी इमेज ऐसी ही बन गयी थी.

Indira Gandhi Biography In Hindi – इंदिरा गाँधी की जीवनी

इंदिरा गाँधी जी का जन्म 19 नवम्बर 1917 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में हुआ था. उनके पिता जी का नाम जवाहर लाल नेहरु और माता जी का नाम कमला था. इंदिरा जी का जीवन परिचय जानने वाले को पता है की उनमें अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना बचपन से ही थी.

इसका सबसे बड़ा कारण था उनका जन्म मोतीलाल नेहरु के परिवार में होना, जो की उनके दादा जी थे. उनका परिवार एक ऐसा परिवार था जिसके कई सदस्य स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों में भाग लेते रहे. उनके पिताजी का नाम जवाहर लाल नेहरु था जो की एक वरिष्ठ वकील थे. उनका भी बड़ा योगदान रहा है भारत की स्वतंत्रता में.

उनकी देशभक्ति का अंदाजा एक ख़ास वाकये से लगाया जा सकता हैं. जब इंदिरा गाँधी जी बहुत ही छोटी थी, 5 से 6 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने विदेशी वस्तुओं को बहिस्कार करने में अपना योगदान दिया था. उनका कुछ प्यारा सा विदेशी सामान जैसे एक इंगलैंड से लायी गयी Doll और कुछ अन्य सामान को उन्होंने उस वक़्त जला डाला था.

बचपन में सभी उन्हें इंदु नाम से बुलाते थे. वैसे उनका पूरा नाम “इंदिरा प्रियदर्शिनी गाँधी” था. वो ब्राह्मण परिवार से थीं और उनका धर्म हिन्दू था. Indira Gandhi Biography Hindi पब्लिश करने का हमारा मकसद यही है की भारत देश के ज्यादा से ज्यादा लोग इंदिरा गांधी जी के जीवन से प्रेरणा ले सकें.

उनकी राशी वृश्चिक थी और उन्होंने कॉलेज तक की पढाई की थी. Indira Gandhi किसी न किसी तरह से देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान चाहती थी. इसके लिए उन्होंने बहुत से बच्चों को साथ लेकर एक बड़ी टीम बनायीं. उस वक़्त उनकी उम्र महज 12 या 13 साल थी, उनकी इस सेना को वानर सेना का नाम दिया गया था.

वो सब बच्चे यानी उनकी टीम घर घर जाकर विदेशी सामान का इस्तेमाल ना करने और स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित करते थे. वो अपने माता पिता की केवल अकेली संतान थी. हालांकि सन 1924 में उनका एक भाई भी हुआ, लेकीन होने के 2 दिन बाद ही उनकी म्रत्यु हो गयी थी.

Education And Lifestyle – Indira Gandhi Biography In Hindi

इंदिरा गाँधी जी बचपन से पढाई लिखाई में तेज थी. वो बुद्धिमान होने के साथ साथ बहुत ही उदार भी थीं. उनकी पढाई लिखाई कई जगहों पर हुयी जैसे भारत, स्विट्ज़रलैंड और इंग्लैंड में. आपको बतादें की इंदिरा जी ने Oxford कॉलेज से भी पढाई की है. वो हमेशा अपने सहपाठियों के साथ भी उदार ही रहीं. उनका व्यवहार शालीन रहा.

Indira Gandhi जी की Education शुरुआत में इलाहाबाद में ही हुयी. उसके बाद उन्होंने दंसवी क्लास पुणे शहर से पूरी की. कॉलेज की पढाई शुरू करने के लिए वो पश्चिम बंगाल गयी और उन्होंने वहां शान्तिनिकेतन विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया. लेकिन उसी बीच एक अड़चन आकर उनके सामने खड़ी हो गयी.

असल में उनकी माता जी कमला नेहरु की तबियत अचानक ज्यादा बिगड़ गयी जो की यूरोप के एक हॉस्पिटल में एडमिट थीं. इस वजह से उन्हें वहां से पढाई छोड़कर निकलना पड़ा. कुछ ही दिन बाद उनकी माता जी की म्रत्यु हो गयी. ये सन 1936 की बात है, उस समय उनके पिताजी भारत की ही किसी जेल में बंद थे.

जब उनकी माता जी ठीक नहीं हो पा रही थी तो उनको स्विट्ज़रलैंड में भी एडमिट करवाया गया, वहां इंदिरा गाँधी जी भी उनके साथ रही. वहां पर भी उन्होंने अपनी पढाई की शुरुआत करने की कोशिश की थी लेकिन वो असफल रही. क्योंकि थोड़े ही दिन बाद उनकी माता का देहांत हो गया था.

अब इंदिरा जी वापिस अपने वतन यानी हिंदुस्तान लौट आई थीं. कुछ दिन यहाँ बिताने के बाद उन्होंने फैसला किया की अब वो इंग्लैंड से अपने College की पढाई पूरी करेंगी. लेकिन वहां भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और उनकी खुद की तबियत अचानक बिगड़ने लगी.

उसके बाद इंदिरा जी अपने देश वापिस लौट आई और उन्होंने पढाई छोड़ने का फैसला करना पड़ा. उन्हें हमेशा इस बात का दुःख रहा की वो अपनी कॉलेज की पढाई को पूरा नहीं कर पायी. अपनी पढाई लिखाई के दौरान उन्हें बहुत सारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा था. जब हम Indira Gandhi Ki Biography पढ़ते हैं तो मालूम पड़ता है की वो कितनी मजबूत थीं.

अब इंदिरा गाँधी जी जवान थीं और उन्होंने गुजरात के रहने वाले Firoz Gandhi जी से शादी करली. माना जाता है की वो दोनों एक दुसरे को बचपन से ही जानते थे. साथ ही ये भी बताया जाता है की पंडित जवाहर लाल नेहरु जी उनके इस फैसले से बिलकुल भी खुश नहीं थे.

लेकिन महात्मा गांधी जी का समर्थन मिलने के कारण जवाहर लाल नेहरु जी भी सहमत हो गए थे. उन्होंने अपने मन से इस बात को निकाल दिया. इंदिरा गाँधी जी की शादी के 2 साल बाद 1944 में उन्हें पहली संतान हुयी. जिसका नाम उन्होंने राजीव गाँधी रखा. उनके बाद एक और संतान हुयी जिन्हें हम संजय गाँधी के नाम से जानते हैं.

जब राजीव गाँधी 16 साल के हुए यानी 1960 में उनके पिता फ़िरोज़ गाँधी की दिल की किसी बीमारी के चलते म्रत्यु हो गयी थी. अब बात करते हैं इंदिरा जी के राजनीतिक सफ़र की. इंदिरा जी का पूरा परिवार शुरू से ही राजनीती में दिलचस्पी रखता था. उनके पिता जी जवाहर लाल नेहरु देश आज़ाद होने के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने थे.

Indira Gandhi Politics Histrory In Hindi – इंदिरा गाँधी जी का राजनितिक सफ़र

इंदिरा गाँधी जी का राजनीति में शुरू से ही इंटरेस्ट था. उन्होंने कई बार इस बारे में अपने पिता के सामने इच्छा व्यक्त की. बचपन से ही वो कई आंदोलनों में भाग लेने की इच्छा रखती थीं. Indira Gandhi Biography In Hindi में अब जानते हैं की उनके राजनीतिक जीवन कैसे हुयी और वो कहाँ तक पहुँच पायी.

जैसे ही हमारा देश आज़ाद हुआ, हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री के रूप में जिनको चुना गया वो थे इंदिरा के पिता जवाहर लाल नेहरु जी. उसके बाद इंदिरा जी भी अपने दोनों बच्चों राजीव और संजय के साथ अपने पिता के पास दिल्ली आ गयीं. उस समय उनके इलाहबाद में ही थे और वो “The National Herald” newspaper के साथ काम कर रहे थे.

उसके बाद 1951-52 में लोकसभा चुनावों से इंदिरा गाँधी ने अपनी सक्रियता दिखाना शुरू किया. क्योंकि उस समय उनके पति फ़िरोज़ खान राय बरेली से चुनाव लड़ रहे थे. उन्होंने उनका काफी प्रचार प्रसार किया और सभाएं आयोजित की.

फ़िरोज़ खान के साथ वो राजनीतिक कार्यों में हमेशा सक्रीय रही. आखिरकार 1959 में उस समय की सबसे बड़ी चुनावी पार्टी Indian National Congress Party का अध्यक्ष चुना गया. इसके बाद तो वो पूरी तरह से राजनीति के रंग में रंग गयीं. पार्टी के लिए हर तरह का फैसला लेना अब उनके ही जिम्मे था.

समय बीतता गया और 27 मई 1964 को जवाहर लाल नेहरु जी इस दुनिया को अलविदा कह गए. इंदिरा जी ने उनसे और महात्मा गाँधी जी से राजनीति के काफी दांव पेंच सीख लिए थे. इसलिए कुछ ही साल बाद उन्होंने खुद चुनाव लड़ने का फैसला किया. उन्होंने चुनाव लड़ा और विजयी हुयी.

उस समय देश में लाल बहादुर शास्त्री जी की सरकार चल रही थी. उन्होंने इंदिरा गाँधी जी को Information And Broadcasting मंत्रालय सौंप दिया. उसके कुछ समय बाद ही लाल बहादुर शास्त्री जी को एक समझौते के लिए ताशकंद जानना था. दुर्भाग्य से अज्ञात कारणों के चलते शास्त्री जी की वही पर म्रत्यु हो गयी.

अब देश को उनका विकल्प चुनना था. उस समय कांग्रेस पार्टी 2 गुटों में विभाजित थी. प्रधान मंत्री के पद के लिए कई उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया गया. आखिरकार अंतरिम चुनाव में जीत हासिल करके Indira Gandhi जी देश की पहली महिला प्रधान मंत्री बन गयी.

उसके बाद इंदिरा गाँधी जी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और देश के विकास के हित में कई फैसले लिए. सन 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में मिली जीत का का श्रेय काफी हद तक इंदिरा गांधी जी को दिया जाता है. उनके द्वारा लिए गए फैसले और पडौसी मुल्कों में उनकी साख के चलते पाकिस्तान पस्त हो गया था.

उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिन्हें आज भी याद किया जाता है. जैसे देश के 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण, कई बड़े उद्योगों का राष्ट्रीकरण, तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण और हरित क्रांति जैसी योजनायें. जिनसे देश को आगे बढ़ने में काफी मदद मिली और देश आत्मनिर्भर बना.

एक बात का जिक्र किये बगैर Indira Gandhi Ki Biography यानी जीवनी पूरी नहीं हो सकती. और वो है आपातकाल की स्थिति. पकिस्तान के साथ युद्ध के बाद हुए चुनावों में विरोधियों ने उनके ऊपर कई आरोप लगाये. उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और बताया की इंदिरा जी ने अनुचित साधनों का प्रयोग किया है.

उनके ऊपर मुकदमा भी दर्ज हो गया था. विरोधियों के भाषणों के कारण देश की जनता में भी इंदिरा जी के खिलाफ रोस बढ़ रहा था. न्यायालय ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया और उन्हें अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने से रोक दिया गया. और उस समय के लिए इंदिरा जी को आदेश दिया गया था की वो अपने विवेक से सीट छोड़ दें.

लेकिन 26 जून 1975 को इस्तीफा देने के बजाय उन्होंने एक हैरान कर देने वाला फैसला लिया. उन्होंने देश में आपातकाल लागू कर दिया. उन्होंने अपने भाषण में कहा की इस समय देश में काफी अशांति है. इसी के चलते उन्हें ये कड़ा फैसला लेना पड़ रहा है. इससे विरोधियों में और ज्यादा खलबली मच गयी.

उन्होंने जगह जगह प्रदर्शन करने शुरू कर दिए. इसके चलते इंदिरा गाँधी जी और भी खतरनाक मूड में आ गयी. उनका रुख विरोधियों के प्रति बहुत ज्यादा आक्रामक हो गया था. उन्होंने अपने सारे राजनितिक विरोधियों को जेल की हवा खिला दी थी. देश में उथल पुथल का माहौल बन गया था. प्रेस पर भी पाबंदी लगा दी गयी थी.

आखिरकार 2 साल बाद 1977 में इंदिरा जी ने आपातकाल के ख़तम होने का फरमान दिया और चुनावों की घोषणा की. उस समय उन्हें आपातकाल और नसबंदी अभियान के चलते जनता ने उन्हें दरकिनार कर दिया और उनके लगातार प्रधानमंत्री बने रहने का सपना टूट गया.

लेकिन इंदिरा जी तो ठहरी संघर्षशील महिला, वो संघर्ष करती रही और 1980 में एक बार फिर से देश की प्रधानमंत्री बन गयीं. सन 1981 में एक और बड़ी घटना घटी जब एक सिख आतंकवादी समुदाय ने खालिस्तान बनाने की मांग की. वो लोग स्वर्ण मंदिर में घुस गए थे. जहाँ बहुत सारी भोली भाली जनता भी मौजूद थी.

इस स्थिति में इंदिरा गाँधी ने कड़ा फैसला लेते हुए सेना द्वारा उन पर बड़ी कारवाई करवाई. सेना ने उस समय काफी ज्यादा गोले बारूद का इस्तेमाल किया था. जिसके चलते बहुत सारे निर्दोष लोगों को अपना जीवन खोना पड़ा. इसके चलते सिखों में इंदिरा गाँधी के प्रति द्वेष की भावना पैदा हो गयी. खैर समय गुजरता गया.

Indira Gandhi Death In Hindi – इंदिरा गाँधी जी की मृत्यु

आखिरकार 31 दिसम्बर 1984 का वो काला दिन आ गया जिस दिन इंदिरा गाँधी जी को इस दुनिया से अलविदा होना पड़ा. इंदिरा जी के खुद के ही बॉडी गार्ड्स सतवंत सिंह और बेंत सिंह ने उन पर कुल 31 गोलियां चलाई. जिससे इंदिरा गाँधी जी की मृत्यु हो गयी.

स्वर्ण मंदिर में हुए नरसंहार के कारण ही उनके बॉडी गार्ड्स में भी आक्रोश था. जिसके चलते उन्होंने ऐसे काम को अंजाम दे दिया. गोलियां मारने के बाद उन्होंने अपने हथियार फेंक दिए और आत्म समर्पण कर दिया. इंदिरा जी के दुसरे बॉडी गार्ड्स इस घटना से हैरान थे.

वो सतवंत सिंह और बेंत सिंह को पकड़कर अन्दर ले गए, जहाँ उन्होंने किसी बात को लेकर बेंत सिंह को वहीँ पर गोली मार दी. जिससे उसकी मौत हो गयी. सतवंत सिंह को बाद में तिहाड़ जेल में डाल दिया गया और उन्हें बाद में फांसी की सजा सुनाई गयी.

तो कुछ ऐसा रहा इंदिरा गाँधी जी के जीवन का सफ़र. सन 1999 में BBC ने एक Online Poll आयोजित किया जिसमें उन्हें “Woman Of The Millenium” घोषित किया था. और वास्तव में वो उसकी हकदार थी भी.

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ये थी Indira Gandhi Biography In Hindi – इंदिरा गाँधी की जीवनी, जिसमें आपने इनका जीवन परिचय और History जानी. पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इसे Like और Share जरूर करें ताकि दुसरे भी इसका लाभ ले सकें. कुछ भी पूछने या बताने के लिए आप हमें comment कर सकते हैं.

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